जल का संरक्षण और समझ

विश्व में लगभग दो-तिहाई जनसंख्या हर वर्ष कम से कम एक महीने जल की जबरदस्त किल्लत से जूझती है |

जिस कारण फसल बर्बाद हो जाती है, जिससे खाद्यान्न की कमी होने के कारण कीमतें बढ़ती हैं और भूखों की तादाद में बढ़ोतरी हो सकती है|

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2050 में 9 अरब अथवा अधिक जनसंख्या के उपयोग के लिए खाद उत्पादन में 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी होनी चाहिए|

किंतु 2030 तक दुनिया को पानी आपूर्ति में 40 फ़ीसदी कमी का सामना करना होगा जिसके लिए जिम्मेदार हैं |

दुनियाभर में इस्तेमाल होने वाले ताजे पानी का 70 प्रतिशत हिस्सा कृषि में चला जाता है|

ताजे पानी की वैश्विक किल्लत ज्यादा हो जाती है| संयुक्त राष्ट्र ने 2030 तक सतत विकास की सूची तैयार  की है| इसमें से छठा लक्ष्य सभी के लिए पानी स्वच्छता सुनिश्चित करने हेतु समर्पित है|

    भारत का वर्तमान जल संकट

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड के जिले जो लगातार सूखे से जूझ रहे हैं|  लगभग 50% जलस्रोत सूख चुके हैं| खेती बर्बाद हो चुकी है| जिस कारण लोगों को पलायन करना पड़ रहा है| इसी तरह हिमाचल प्रदेश में शिमला पहाड़ी शहर में भीषण संकट से जूझ रहा है|
-जहां दूषित जल आपूर्ति के कारण पीलिया रोग फैला है|
जिस देश में 14 बड़ी 55 सामान्य 700 छोटी नदियां हैं|
हर वर्ष औसतन 1170 मिलीमीटर वर्षा होती है और हर जगह वर्षा जल संरक्षण की परंपरा रही है|
यहां पानी की  वास्तविक किल्लत कम है और पानी का कूप्रबंधन अधिक है|

    उपाय

1. गांव में सूखा राहत समितियों का गठन
2. आत्महत्या को रोकना
3. पेयजल की किल्लत के क्षेत्रों में पानी के टैंकरों से आपूर्ति
4. जल संरक्षण निकायों का निर्माण
भारत में प्रतिवर्ष औसतन 1100 मिलीमीटर वर्षा होती है|
जिसमें ज्यादातर लगभग 100 घंटों में हो जाती है बारिश के पानी को वापस प्राकृतिक चक्र में पहुंचाने का अर्थ है|
उसे इकट्ठा करना साफ करना रखना और उसे छोड़ देना|

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