निजीकरण का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव का Best आकलन 2021

हाल के दिनों में निजीकरण शब्द का काफी उपयोग हो रहा है जिससे आप भी भलीभांति परिचित होंगे आज के परिपेक्ष में हम जिस आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं उसका प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं परंतु इसके बावजूद सरकार ने जो कदम उठाए वह सराहनीय है इसमें से एक कदम निजीकरण का है|

निजीकरण
निजीकरण

निजीकरण क्या है

जब सरकार सरकारी उद्यमिता को निजी क्षेत्रों में स्थानांतरित करने लगती है उसे निजीकरण कहा जाता है दूसरे शब्दों में समझें तो किसी सार्वजनिक उपक्रम की स्वामित्व या प्रबंधन सरकार द्वारा त्यागना|

निजीकरण का लाभ

मौजूदा समय में सरकार ने आर्थिक विकास को सुधारने के लिए बजट 2021-22 में पौने दो लाख करोड़ का विनिवेश करने का प्रस्ताव रखा है जिसके मद्देनजर यह समझा जा सकता है कि सरकार निजीकरण के लिए कितनी प्रतिबंध है जिससे सरकार को बाजार में एक प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाने में सफलता मिलेगी|

इसका दूसरा पहलू यह है कि सरकारी संस्थाओं में नौकरशाहों का बोल बाया ज्यादा रहता है जिससे काम की स्थिति खराब होती रहती है निजी करण से संस्था को काम करने में निपुणता अधिक होती है| जिससे उपभोक्ताओं को लाभ भी होगा तथा सस्ते और बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद मिलेंगे| अगर हम इसी उदाहरण से समझे तो कुछ समय पहले एयर इंडिया सरकारी संस्था अंतर्गत आती थी उस समय घाटे में चल रही थी परंतु जब उसका निजी करण किया गया तो कुछ समय बाद उसके संचालन में सुधार आया|

निजीकरण से समस्या

वर्तमान समय में सरकार ने जिले की करण में अपनी जो प्रतिबद्धता व्यक्त की है जिससे सरकारी संस्थाओं में निजी करण का आगमन हो रहा है जिसके कारण रोजगार की संभावना कम होने की आशंका है क्योंकि हम जानते हैं कि सरकारी संस्थाओं में कर्मचारियों की संख्या अधिक है इसके कारण का कम जोड़ दिया जाएगा इसकी वजह से की संभावना बढ़ सकती है| उदाहरण के लिए वर्तमान समय में चल रहे बैंकों की हड़ताल का होना इसी बात की आशंका को प्रकट करता है|

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