पित्रात्मक समाज में महिलाओं की Best स्थिति 2021

आज हम 21वीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं फिर अगर हम पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं की स्थिति को समझो तो एक तरफ महिला जो समाज के शीर्ष पर स्थापित है तो दूसरी तरफ समाज उसे पुरुष की भांति समानता देने में अपना अड़ियल रुख को अपनाता नजर आ रहा है इसके बावजूद हम यह कह सकते हैं कि महिलाओं की स्थिति में अभूतपूर्व बदलाव आए हैं

पित्रात्मक समाज में महिला
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पित्रात्मक समाज में महिला

समाज में महिलाओं की स्थिति

पुरुष प्रधान समाज प्राचीन समय से चलाया जिसके नतीजे महिलाओं को बहुत सी समस्याओं का सामना पड़ता हां तुरंत आज की तुलना भूतकाल के समय से किया जाए तो वह संतोषजनक है फिर भी एक प्रश्न सूचक था लगा हुआ है कि महिलाएं आज भी सुरक्षित है आपको इसका अंदाजा मेरे इस उदाहरण से लगा सकते हैं

कि आपने शहरों में बड़े-बड़े अस्पतालों के बाहर एक स्लोगन लिखा मिलता है कि “यहां लिंग परीक्षण नहीं किया जाता लिंग परीक्षण कानूनी अपराध है” मैं इस स्लोगन को ना ही गलत कहना और ना इसका विरोध करता हूं क्योंकि जानकारी ही बचाव परंतु जब हम आज इस वैज्ञानिक युग में जी रहे हैं तो हमें इस स्लोगन को पढ़ने के बाद ऐसा नहीं लगता है कि आज भी महिलाएं कहीं ना कहीं समस्याओं से जूझ रही है चाहे वह मां के गर्भ में हो या किशोरावस्था में|

महिलाओं की स्थिति में सुधार

महिलाओं की स्थिति में सुधार का परिचय समय दर समय में बढ़ता जा रहा है जहां आजादी के समय महिला का साक्षरता दर करीब 6 प्रतिशत थी परंतु जब हम आज किसी शताब्दी में प्रवेश कर चुके हैं तो साक्षरता दर करीब 65 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और महिलाएं हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है खेल का मैदान हो या जंग का मैदान महिला हर क्षेत्र में अपने जो संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है इसका सबसे बड़ा उदाहरण हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक वक्त में झलकती है कि सेना में महिलाओं के स्थाई कमीशन नहीं दिए जाने पर कहां कि “हमारे समाज का ढांचा पुरुषों तथा पुरुषों के लिए तैयार किया गया है”

समाज में महिलाओं का योगदान

हमारे समाज भले ही पितृसत्तात्मक समाज रहा हूं तुरंत महिलाओं का योगदान पुरुषों से कहीं ज्यादा है बदलते आपको देखने वाली दृष्टि होनी चाहिए

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